हिंदी वर्ण क्रम
Thread poster: Balasubramaniam L.

Balasubramaniam L.  Identity Verified
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Nov 13, 2008

हाल के एक कुडोस प्रश्न में हिंदी वर्ण क्रम के बारे में पूछा गया था।

http://www.proz.com/kudoz/hindi_to_english/computers:_hardware/2927030-hindi_alphabetical_order.html?login=y

वहां इस महत्वपूर्ण विषय पर विस्तृत चर्चा की गुंजाइश कम है और इसलिए कुछ उत्तरदाताओं ने सुझाया था कि इसे हिंदी मंच में उठाया जाए। इसलिए मैंने इस विषय को यहां विचारार्थ प्रस्तुत करना उचित समझा है।

आशा है कि प्रोज.कोम के हिंदी अनुवादक इस विषय के अनेक पहलुओं पर प्रकाश डालेंगे जिसके परिणामस्वरूप हिंदी का निर्विवाद वर्णक्रम स्पष्ट होगा। यह हिंदी अनुवादकों के लिए भी उपयोगी होगा क्योंकि उन्हें अक्सर शब्दों को हिंदी वर्णक्रम में रखने की समस्या का सामना करना पड़ता है।


 

Lalit Sati  Identity Verified
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हिन्दी व्याकरण Nov 13, 2008

धन्यवाद बालाजी,
एक महत्वपूर्ण विषय पर आपने इस मंच पर अपने विचार रखे। सबसे पहले ये उद्धरण :

"जीवंत भाषा का यह लक्षण है कि उसमें परिवर्तन होते ही रहते हैं। हमारे देखते-देखते अंग्रेज़ी जैसी पुरानी भाषा में परिवर्तन होते जा रहे हैं।..."
"भाषा एक प्रणाली है, अर्थात इसमें एक व्यवस्था विद्यमान रहती है। उक्त व्यवस्था में थोड़ा-बहुत परिवर्तन कर सकते हैं : परंतु ऐसा करने की एक सीमा होती है।..."
- डॉ.ब्रजमोहन, प्रसिद्ध भाषाशास्त्री

फिलहाल, वर्णमाला पर केन्द्रित करते हुए मैं यहाँ पर एक 'लिंक' प्रस्तावित कर रहा हूँ कि उसमें दिये गये वर्ण-विचार (अध्याय-2) पर साथी अनुवादक अपनी राय प्रस्तुत करें।
आगे चलकर व्याकरण के कुछ बुनियादी नियमों पर स्पष्टता बनाते हुए हम सर्वानुमति से एक 'स्टाइल शीट' भी विकसित कर सकते हैं।

लिंक यह है :
http://pustak.org/bs/home.php?bookid=4883&booktype=free

मुझे उम्मीद है कि कुडोज़ "प्रतियोगिता" से इतर इस विचार-विमर्श को आगे बढ़ाया जायेगा।

ललित


 

Lalit Sati  Identity Verified
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स्वर एवं व्यंजन Nov 13, 2008

"हिन्दी व्याकरण ज्ञान की प्रवेशिका" से

स्वर-
जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से होता हो और जो व्यंजनों के उच्चारण में सहायक हों वे स्वर कहलाते है। ये संख्या में ग्यारह हैं-
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।

व्यंजन
जिन वर्णों के पूर्ण उच्चारण के लिए स्वरों की सहायता ली जाती है वे व्यंजन कहलाते हैं। अर्थात व्यंजन बिना स्वरों की सहायता के बोले ही नहीं जा सकते। ये संख्या में 33 हैं। इसके निम्नलिखित तीन भेद हैं-
1. स्पर्श
2. अंतःस्थ
3. ऊष्म
1.स्पर्श-
इन्हें पाँच वर्गों में रखा गया है और हर वर्ग में पाँच-पाँच व्यंजन हैं। हर वर्ग का नाम पहले वर्ग के अनुसार रखा गया है जैसे-
कवर्ग- क् ख् ग् घ् ड़्
चवर्ग- च् छ् ज् झ् ञ्
टवर्ग- ट् ठ् ड् ढ् ण् (ड़् ढ्)
तवर्ग- त् थ् द् ध् न्
पवर्ग- प् फ् ब् भ् म्
2.अंतःस्थ-
ये निम्नलिखित चार हैं-
य् र् ल् व्
3.ऊष्म-
ये निम्नलिखित चार हैं-
श् ष् स् ह्

जहाँ भी दो अथवा दो से अधिक व्यंजन मिल जाते हैं वे संयुक्त व्यंजन कहलाते हैं
क्ष=क्+ष
ज्ञ=ज्+ञ
त्र=त्+र

अनुस्वार- इसका प्रयोग पंचम वर्ण के स्थान पर होता है। इसका चिन्ह (ं) है। जैसे- सम्भव=संभव, सञ्जय=संजय, गड़्गा=गंगा।
विसर्ग- इसका उच्चारण ह् के समान होता है। इसका चिह्न (:) है। जैसे-अतः, प्रातः।
चंद्रबिंदु- जब किसी स्वर का उच्चारण नासिका और मुख दोनों से किया जाता है तब उसके ऊपर चंद्रबिंदु (ँ) लगा दिया जाता है। यह अनुनासिक कहलाता है। जैसे-हँसना, आँख।
हिन्दी वर्णमाला में 11 स्वर तथा 33 व्यंजन गिनाए जाते हैं, परन्तु इनमें ड़्, ढ़् अं तथा अः जोड़ने पर हिन्दी के वर्णों की कुल संख्या 48 हो जाती है।

(http://pustak.org/bs/home.php?bookid=4883&booktype=free)


 

Balasubramaniam L.  Identity Verified
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TOPIC STARTER
Nov 13, 2008

हिंदी वर्णक्रम से संबंधित अनेक प्रश्न हैं। कुछ की चर्चा उस कुडोस वाले लिंक में हो चुकी है।

एक अन्य मुद्दा नुक्तावाले शब्दों को लेकर है। आप सब जानते होंगे कि देवनागरी लिपि का प्रयोग हिंदी के साथ-साथ उर्दू के लिए भी होता है, और हाल के दिनों में उर्दू की अधिकाधिक किताबें देवनागरी में छपने लगी हैं। इसकी शुरूआत तो प्रेमचंद से ही हो गई थी, जिन्होंने लेखनकार्य उर्दू से शुरू किया था लेकिन उर्दू में छपी अपनी किताबों की बिक्री न होने से वे देवनागरी में अपनी किताबें छपवाने लगे। यही रणनीति अनेक उर्दू लेखक भी अपना रहे हैं। जब उर्दू को देवनागरी में लिखते हैं, सही उर्दू उच्चारण लाने के लिए अनेक व्यंजनों में नुक्ता लगाया जाता है, याथा, जमीन (हिंदी)- ज़मीन (उर्दू), कानून (हिंदी) - क़ानून (उर्दू), इत्यादि। इस तरह के अनेक शब्द हैं, जो हिंदी-उर्दू दोनों में चलते हैं, जब ये शब्द उर्दू में लिखे जाते हैं, उनमें नुक्ता लगता है, जब ये हिंदी में लिखे जाते हैं, तो वे बिना नुक्ते के लिखे जाते हैं।

किशोरीदास वाजपेयी आदि वैय्याकरणों ने हिंदी में नुक्ता लगाने की बीमारी का घोर विरोध किया है और केवल जब उर्दू देवनागरी में लिखी जाए, तभी इस तरह के शब्दों मे नुक्ता लगाने की अनुमति दी है।

इस तरह के शब्दों के साथ-साथ, अनेक तकनीकी शब्द भी नुक्ता लगाकर लिखे जाते हैं, जैसे फ़ाइल, फ़ोर्मौट, ज़ूम, आदि, हालांकि इन्हें नुक्ते के बिना भी, फाइल, फोर्मैट, जूम आदि के रूप में, लिखा जाता है।

वर्णक्रम की दृष्टि से यह नुक्ता परेशानी पेश करता है। कानून और क़ानून में से कौन-सा शब्द पहले आएगा और कौन-सा बाद में? वर्ण क्रम की दृष्टि से फोर्मैट को पहले लिखें या फ़ोर्मैट को?

इस विषय के बारे में भी अन्य अनुवादकों की राय जानना उपयोगी होगा। आशा है कि इस थ्रेड में इस विषय पर और जवाब प्रकाशित होंगे, ताकि, जैसा कि ललित जी कहते हैं, अंत में एक सर्वमान्य स्टाइल शीट विकसित की जा सके, जो हर अनुवादक के लिए उपयोगी होगी।

[2008-11-13 10:27 पर संपादन हुआ]


 


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