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Hindi to English: I did this work for Apple Mobile
General field: Tech/Engineering
Detailed field: Business/Commerce (general)
Source text - Hindi
अनरियल इंजन ४ गेम इंजन से बना इस सीरीज़ के लिए बहुत बड़ा क़दम है जिसमें ऐनिमेंशंस और बॉल मूवमेंट में बहुत सुधार दिखता है। अगर आप बहुत ग़ौर से नहीं देखेंगे, तो आपको इसमें और टेलीविज़न पर दिखाए जाने वाले गेम में फ़र्क़ नहीं नज़र आएगा।

इसमें खिलाड़ी और टीम के अपडेटेड आँकड़ों के साथ 10 से अधिक नए लीग्स जोड़े गए हैं जिनमें जे-लीग और बेल्जियम, स्कॉटलैंड, डेनमार्क, पुर्तगाल और अर्जेंटीना के लीग्स शामिल हैं। यही नहीं, हमने गेम को और मज़ेदार बनाते हुए गोल के जश्न को भी अच्छा-ख़ासा लंबा बनाया है

‘प्लेयर्स ऑफ़ द वीक’ में आपको असल ज़िंदगी में लगातार कामयाबी पाने वाले खिलाड़ी दिखेंगे। उनके आँकड़े अब उनके सबसे हाल के परफ़ॉर्मेंसेज़ दिखाने के लिए अपडेट किए जाते हैं और ट्रांसफ़र्स भी हर सप्ताह अपडेट होते हैं।
Translation - English
Built using the Unreal Engine 4 game engine, is a huge step forward for the series, greatly improving animations and ball movement. Cross your eyes a little and you won't be able to tell the difference between this and televised game.

Alongside updated player and team stats, over 10 new leagues have been added including J-League and leagues from Belgium, Scotland, Denmark, Portugal, and Argentina. Oh, and as a fun extra flourish, goal celebrations have also been expanded a great deal.

'Players of the Week' is where you can find players who are on a hot streak in real life. Their stats are now updated to reflect their latest performances, with transfers also updated weekly.
English to Hindi: I do regular translation for IIT, BOMBAY (INDIAN INSTITUTE of TECHNOLOGY)
General field: Medical
Detailed field: Medical: Instruments
Source text - English
UP’s Aneesh Karma creates orthotic with 135 degree flexion: wins NCPEDP-Mphasis Universal Design Award

Aneesh’s KAFO (knee ankle-foot orthosis) innovation has won multiple awards

The story of Aneesh Karma, an innovator from BETiC IIT-Bombay, winner of the 10th NCPEDP- Mphasis Universal Design Awards is one of courage.

Coming from a humble background, born to illiterate parents, Aneesh was afflicted by polio in his childhood. His innovation, the knee ankle-foot orthosis (KAFO) offers a solution for those affected by polio, paralysis, cerebral palsy, neuromuscular disorders and accidents.

The device created by Karma is superior compared to the free drop-lock callipers provided by the Government which are uncomfortable, stiff and do not allow activities such as climbing stairs, boarding vehicles or cycling. They weigh 3 kgs and also result in an abnormal gait.

Aneesh’s KAFO is versatile, with a 135-degree angle flexion for squatting, walking and cycling. It weighs only 1.3 kg, and can provide support to an individual weighing up to 120 kg. Along with all of this, it is multiple footwear compatible and is affordably priced. Imported orthotics, with intelligent sensor systems which control the knee joint through pneumatics, linear springs, hydraulics and torsional rods are too expensive.

On receiving the award, Aneesh, who has completed his education only unto his 12th standard shared that “In India there are 1.2 million Polio patients, while in the world, there are over a 100 million patients with Cerebral Palsy, spinal cord injuries, multiple sclerosis. However, only 40,000 calipers have been supplied per year in India by ALIMCO, BMVSS & NSS. This is due to how expensive it is.”

In 2015, Aneesh filed a patent with the help of the National Research Development Corporation (NRDC). In 2018, Aneesh joined the BETiC Lab to further develop his design of the advanced knee ankle-foot orthosis. Aneesh went on to file his second patent in the same year and bagged the BIG Idea Summit 2018 Award. In 2019, Aneesh also won the BIRAC Biotechnology Ignition Grant.

Arman Ali, ED of NCPEDP says '' the mechanically-actuated stance-controlled KAFO is an innovation with potential. It gives independence to those with impaired mobility and allows them access which in turn improves their quality of life allowing them to live with dignity.”

Aneesh’s mentor at BETiC IIT Bombay, Prof B Ravi says,” Even 72 years after independence, 78 % of these products are imported. Indigenous medical device innovation like KAFO can bridge this gap.”

“I could not finish my education due to our poor financial condition. But I didn’t want to bow down to fate. Any kind of disability should not become an obstacle to success. It was my dream to invent better callipers for myself and others like me,” sums up Aneesh.

Aneesh is now also looking to develop prosthetics for individuals with spinal conditions. He is also looking to incubate a start-up company to scale up innovation in order to benefit many others.
Translation - Hindi
135 डिग्री तक घूम सकनेवाला कृतिम घुटना (ऑर्थोटिक) बनाकर उत्तर प्रदेश के अनीस कर्मा ने जीता एनसीपीईडीपी-एमफासिस यूनिवर्सल डिजाइन पुरस्कार

उत्तर प्रदेश के छोटे से कस्बे से आए अनीस कर्मा की ‘काफो’ कृतिम जोड़ डिवाइस (घुटना-टखना और पैर) खोज अब तक कई पुरस्कार अर्जित कर चुकी है। मुंबई आईआईटी के बेटिक (BETiC) के शोधकर्ता और अब तक दस एनसीपीईडीपी-एमफासिस यूनिवर्सल डिजाइन पुरस्कार विजेता अनीस कर्मा अदम्य साहस और पुरूषार्थ के ज्वलंत उदाहरण हैं।

अशिक्षित अभिभावकों और साधारण परिवार में जन्म लेनेवाले अनीस बचपन में ही लकवा (पोलियो) के शिकार हो गए। घुटने-टखने और पैरों के कृतिम जोड़ तैयार कर अनीस ने पोलियो, पक्षाघात (पैरालिसिस), पेशीय दुर्विकास (न्यूरोमस्कुलर), मस्तिष्क पक्षाघात और दुर्घटना (एक्सिडेंट) के शिकार हुए लोगों को उम्मीद की एक नई किरण दी है।

सरकारी तंत्र द्वारा उपलब्ध कराए गए फ्री ड्रॉप-लॉक कैलिपर्स असुविधाजनक और सख्त कड़े होने के कारण सीढ़ियां चढ़ने, वाहनों में बैठने और साइकिल चलाने लायक नहीं होते। करीब तीन किलो का वजन होने के इन सभी कारणों से दैनिक उपयोग में उतने प्रयुक्त नहीं होते जबकि अनीस द्वारा निर्मित कृतिम जोड़ काफी उन्नत हैं और इन सारी प्रकियाओं में सुविधानजक साबित हुए हैं।

अनीस का ‘काफो’ कृतिम जोड़ अपनी 135 डिग्री तक घूम सकने की क्षमता की बदौलत उपयोग करनेवाले को घुटने मोड़कर झुकने, चलने और साइकिल चलाने में पूर्णत: सहायक है। केवल 1.3 किलो के वजन की बदौलत यह 120 तक के वजनवाले किसी भी व्यक्ति के लिए उपयोग में कारगर है। इन सारी सुविधाओं के अलावा इसमें हर तरह के जूते, चप्पल का प्रयोग हो सकता है। कृतिम घुटनों के आयातित पुर्जों की मदद से बने इस डिवाइस की कीमत भी काफी व्यवाहारिक है। इसमें लगी बौद्धिक सेंसर प्रणाली (Intelligent sensor systems) में काफी कीमती वायु संचालित (pneumatics) लाइनर स्प्रिंग, हाइड्रॉलिक व टॉर्सनल छड़ों का प्रयोग हुआ है।

सिर्फ 12वीं तक की पढ़ाई करनेवाले अनीस ने पुरस्कार हासिल करने के बाद कहा –‘भारत में 12 लाख पोलियो के मरीज हैं जबकि विश्व भर में एक करोड़ से अधिक लोग पक्षाघात, मस्तिष्क पक्षाघात, रीढ़ की चोट, मल्टीपल स्कलेरोसिस और अन्य दुर्घटनाओं के शिकार हैं। इस हाल के बावजदू भारत में एलिम्को, बीएमवीएसएस और एनएसएस के सहारे केवल 40,000 कैलिपर्स की ही आपूर्ति हो पाती है। इससे पता चलता है कि यह कितना खर्चीला है।

2015 में नेशनल रिसर्च डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनआरडीसी) के सहारे इस डिवाइस के पेटेंट का आवेदन किया था। 2018 में अनीस बेटिक लैब से जुड़े और अपने कृति घुटने और पैर के डिवाइस पर अधिक सघनता से काम करना शुरू किया। इसी साल के अंत में अनीस ने दूसरे पेटेंट का आवेदन किया और उसी साल ‘बिग आइडिया’ समिट -2018 अवॉर्ड जीता। 2019 में अनीस को इसके लिए बीराक बायोटेक्नॉलजी इग्निशन अनुदान भी मिला।

एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली कहते हैं –‘अभियांत्रिकी की मदद से नियंत्रित यह काफो डिवाइस क्षमताओं से पूरिपूर्ण शोध है। संचालन में दिव्यांग लोगों को यह डिवाइस एक ऐसी स्वतंत्रता देता है जिसके सहारे उनकी जीवन शैली का स्तर ही विकसित नहीं होता बल्कि उन्हें सम्मान के साथ जीने का अवसर भी मिलता है।

आईआईटी मुंबई बेटिक प्रकोष्ठ में अनीस कर्मा के संरक्षक प्रो. बी. रवि कहते हैं –‘स्वतंत्रता प्राप्ति के 72 वर्ष बाद भी हमें 78% उपकरणों का आयात करना पड़ता है। अब स्वदेशी तकनीक से बनी काफो जैसी मेडिकल डिवाइस की खोज इस अंतर को दूर करने में सक्षम है।’

इस पर अपनी बात रखते हुए अनीस कहते हैं –‘मैं अपनी गरीबी और वित्तीय स्थितियों के कारण अपनी शिक्षा पूरी ना कर सका लेकिन मैंने किस्मत से हार नहीं मानी। मेरा मानना है कि अपंगता किसी के सफलता के मार्ग का रोड़ा नहीं बननी चाहिए। अपने इसी सपने का लक्ष्य रखकर मैंने अपने और मेरे जैसे सभी दूसरों के लिए ऐसे उन्नत कैलिपर्स की इजाद की।

अब अनीस रीढ़ की हड्डी के विकार से ग्रसित लोगों के लिए कृतिम अंग बनाने जा रहे हैं। साथ ही वे ऐसी नई स्टार्ट अप कंपनी की तलाश कर रहे हैं जो उनकी शोध को मुकाम तक पहुंचाए जिससे सभी को इसका फायदा पहुंच सके।
English to Hindi: Tata Group's social awareness campaign
General field: Marketing
Detailed field: Finance (general)
Source text - English
1) Translation is a art which requires science of logic.
2) Translation should not be literal or by word to word.
3) Translator should focus on essence of the sentence and should translate the soul of the matter as required by the field, country and market requirement.
Translation - Hindi
1) अनुवाद एक कला है और जिसे तर्क के विज्ञान की जरूरत होती है।
2) अनुवाद कभी भी ना तो सीधे शब्दों का और ना ही शब्दश: होना चाहिए।
3) अनुवादक को हमेशा पहले वाक्य को पढ़कर उसे अपने जेहन में उतारने और अपने शब्दों में उसकी आत्मा ढ़ालने के बाद देश, स्थिति और मार्केट की जरूरत के मुताबिक शब्द देने चाहिए।

Translation education Master's degree - Mumbai University
Experience Years of experience: 26. Registered at Nov 2018. Certified PRO certificate(s) N/A
Credentials N/A
Memberships N/A
Software Adobe Acrobat, Indesign, Microsoft Excel, Microsoft Office Pro, Microsoft Word, QuarkXPress
CV/Resume English (PDF)
Professional objectives
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A multi-skilled professional with more than 25 years of experience in English, Hindi, Marathi, Gujarati translation, copy writing, voice over, Sub titling, Rapid news translation & Presentation and reporting. Have successfully worked with the leading Indian newspaper & translation agencies and taken care of the content quality in an editorial capacity.
Keywords: Translation

Profile last updated
Aug 31, 2019

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